Tuesday, 10 February 2026

बारिश

 चलो आज बारिश को चाय पे बुलाते हैँ।

थक गया हूं थोड़ा,कुछ भीगते गुनगुनाते हैँ।

चलो आज बारिश को चाय पे बुलाते हैँ।


भर गया है मन बहुत, इन्न् भरे आंसुओं को 

उसके पानी में मिलाते हैँ।

चलो आज बारिश को चाय पे बुलाते हैँ।


दिल में जो दर्द है जो गम् है उसको थोड़ा याद करते हैँ 

थोड़ा भुलाते हैँ।

चलो आज .....


अकेले ही अकेले खुद से रूठते हैँ फिर खुद को मनाते हैँ।

चलो आज ....


मोहब्बत से बिछड़ जाने वाले,उस्के आने से लेकर् 

उस्के जाने वाले ,वो नग्मे फिर से गुनगुनाते हैँ।

चलो आज .....


खुद से किये वो  नामुकम्मल् वादे ,

जी भर के एक आख़री बार ज़िंदगी को आगोश में लेने के इरादे 

चलो एक् बार् फिर् खुद को आज़माते हैँ।

चलो आज बारिश को चाय पे बुलाते हैँ।


: अनादि